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दो दूना बाईस

डी. के. निवातिया

डी. के. निवातिया

गज़ल/गीतिका

October 12, 2017

दो दूना बाईस

बेवजह में वजह ढूंढने की गुंज़ाइश चाहिये !
काम हो न हो पर होने की नुमाइश चाहिये !!

कौन कितना खरा है, किसमे कितनी खोट !
पहले इस बात की होनी आजमाइश चाहिये !!

दिखावे के दौड़ में शामिल है हर कोई शख्श !
तबज्जो पाने के लिए नई फरमाइश चाहिये !!

इंसान इस कद्र आमादा है अपनी गंगा बहाने को !
ढहे मंदिर या मस्जिद, नपी-तुली पैमाइश चाहिये !!

कटे किसी की गर्दन, या शूली चढ़ाया जाये !
किसी भी हाल पूरी अपनी ख्वाहिश चाहिये !!

मुफ्त में बना देंगे खुदा का रहबर हर किसी को !
शर्त ये है मगर, रईसी में होनी पैदाइश चाहिये !!

कौन चाहता है “धर्म” के फल कर्मानुसार मिले !
बिन हेर-फेर सीधे सीधे दो दूना बाईस चाहिये !!
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डी के निवातिया

Author
डी. के. निवातिया
नाम: डी. के. निवातिया पिता का नाम : श्री जयप्रकाश जन्म स्थान : मेरठ , उत्तर प्रदेश (भारत) शिक्षा: एम. ए., बी.एड. रूचि :- लेखन एव पाठन कार्य समस्त कवियों, लेखको एवं पाठको के द्वारा प्राप्त टिप्पणी एव सुझावों का... Read more
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