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दो आफ़ताब (शायरी)

डॉ सुलक्षणा अहलावत

डॉ सुलक्षणा अहलावत

शेर

August 10, 2016

आज दो गुलाब एक साथ देखे,
इतने हसीं ख्वाब एक साथ देखे।
दिल की धड़कन ही रुक गयी थी,
जब दो आफ़ताब एक साथ देखे।।

©® डॉ सुलक्षणा अहलावत

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डॉ सुलक्षणा अहलावत
लिख सकूँ कुछ ऐसा जो दिल को छू जाये, मेरे हर शब्द से मोहब्बत की खुशबु आये। शिक्षा विभाग हरियाणा सरकार में अंग्रेजी प्रवक्ता के पद पर कार्यरत हूँ। हरियाणवी लोक गायक श्री रणबीर सिंह बड़वासनी मेरे गुरु हैं। माँ... Read more
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