दो अन्जाने

दो अन्जाने
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कैसी ये भगवान की लीला है
दो अन्जान लोग
सामाजिक बंधनों में
अटूट रिश्ते में बँध जाते।
फिर जीवन में
सबसे करीब हो जाते हैं।
अपने दिल की हर बात
एक दूजे से बिना संकोच
कह जाते हैं।
जीवन का हर सुख
साथ मिलकर उठाते हैं,
एक दूजे के लिए
जान की बाजी भी लगाने को
तैयार रहते हैं।
दुनियां में वे एक दूजे पर
खुद से ज्यादा विश्वास करते हैं,
जीवन की हर मुश्किलें
मिलकर झेल लेते हैं।
इनमें झगड़े भी कम
नहीं होते हैं।
पर ये झगड़े तो
उनके संबंधों को
और मजबूती देते हैं।
ये रिश्ता संसार का अजूबा है
इस रिश्ते के भाव
कभी समझ आते
कभी प्रश्नचिह्न खड़ा करते,
शायद इसी लिए तो
दो अन्जाने के संबंध निभ जाते।
वे पति पत्नी कहलाते।
✍सुधीर श्रीवास्तव
गोण्डा, उ.प्र.
8115285921

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