दोहे

करना प्रभु इतनी दया , रखना करुणा दृष्टि |
उपजे जग में प्रेम धन , ऐसी करना वृष्टि ||

नवता को धारण करे , अब मनु की संतान |
नवल वर्ष में त्याग दे , कलुशित मन अभिमान ||

पूरण हो मन कामना , मंगलमय हो वर्ष |
मिले सफलता यश बढे , जन-मन में हो हर्ष ||

सुदिन सुमंगल मय रहे मास बारहों खास |
जीवन में उल्लास हो पूरण हो हर आस ||

प्रीत पले उर में सदा ,मंजिल पायें पाँव |
मंगल मय हो वर्ष यह , घिरे न गम की छाँव||

नवल भास्कर उदित हो , फैलाये उजियार |
मिटे तमस जग का सकल ,कहीं न हो अँधियार ||

सदगुण से परिपूर्ण हो , अब मनु की संतान |
नफ़रत भ्रष्टाचार से ,मनुज रहे अंजान ||
मंजूषा श्रीवास्तव

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