Jul 8, 2016 · कविता
Reading time: 1 minute

दोहे

जिस संस्कृति की भक्ति ने दिया विश्व को ग्यान
उसी भक्ति की शक्ति से क्यों हैं हम अनजान
भरत वंश की धरा पर संस्कृति हुई गरीब
चलें छोड़कर लीक को तो क्या करें नसीब
विश्व कृष्ण को मानता गाये उनके गीत
किन्तु बने हम आज क्यों पक संस्कृति के मीत
जो शाश्वत है सत्य का ईश रूप अवतार
सब में व्यापक हो रहा वही अक करतार
भारत जैसा मिलेगा कहाँ विलक्षण देश
परदेशी हैं घूमते धर कर देशी. वेश

2 Comments · 359 Views
Share
Copy Link
Suresh Soni
Suresh Soni
2 Posts · 372 Views
Follow 1 Follower
सुरेशसोनी"शलभ", सिवनी.मालवा, जिला=होशंगाबाद, मध्यप्रदेश | श्रंगार ,देशभक्ति ,गीत गजल ,मुक्तक | स्वन्ताय सुखीय समाज सेवा... View full profile
You may also like: