दोहे की दो पंक्तियाँ

दोहे की दो पंक्तियाँ, .रखतीं हैं वह भाव ।
हो जाए पढ कर जिसे,पत्थर मे भी घाव!!

दोहे की दो पंक्तियाँ, करती प्रखर प्रहार!
फीकी जिसके सामने,तलवारो की धार!!

दुष्ट तजे कब दुष्टता,..दुष्ट भूमि पर भार !
चाहे जितना कीजिए,उसे ह्रदय से प्यार! !
रमेश शर्मा.

Like 1 Comment 0
Views 151

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share
Sahityapedia Publishing