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तीन छंद

डॉ गोरख प्रसाद मस्ताना

डॉ गोरख प्रसाद मस्ताना

कविता

October 1, 2017

आग इर्ष्या की जलाती उसे जो जलता है
जैसे लकडी कोई जलती है राख होती है

हम जो कल थे वही हैं आज,मुस्कुराते है
गमों के बीच भी, मस्ताना कहे जाते हैं

हारता है वो जो जीतने के लिये मरता है
हम तो हर हार में जीतने की खुशी पाते हैं
@डॉ.गोरख प्रसाद मस्ताना

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Author
डॉ गोरख प्रसाद मस्ताना
नाम : डॉ गोरख प्रसाद मस्ताना जन्म तिथि : 01 फ़रवरी, 1954 निवास : "कव्यांगन", पुरानी गुदरी, महाबीर चौक बेतिया, पश्चिमी चंपारण, बिहार - 845438 शिक्षा : एम.ए. (त्रय), पीएच -डी (हिंदी) प्रकाशित पुस्तक : (1 )जिनगी पहाड़ हो गईल... Read more

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