दोहा

होती है जग की यहीं , देख पुरानी रीत।
हार के बाद ही मिले, खुशी भरा इक जीत।।१।।

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मैं विनय कुशवाहा 'विश्वासी' देवरिया (उत्तर प्रदेश) का निवासी हूँ। मैं अभी कवि जैसा बनने...
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