दोहा

प्रात काल उठकर करें, नित भू को स्पर्श।
अन्न, जल, आश्रय सदा , देती हमें सहर्ष।।

जिस घर में हो प्रभु भजन, वहीं रहे भगवान।
जिस घर में हो भागवत, वह घर तीर्थ समान।।

नित्य नियम से जो करें, गायत्री का जाप।
परम सिद्धि को प्राप्त कर, जीवन हो निष्पाप।।

स्वप्न लोक के फूल से, जीवन का निर्माण।
अमर हमारा राज्य है, सोचे पागल प्राण।।

-लक्ष्मी सिंह

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