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“दोहा मुक्तक”

Mahatam Mishra

Mahatam Mishra

मुक्तक

December 6, 2017

“दोहा मुक्तक”

सच्चाई दिखती नहीं, डेरा तेरा भूत।
राम रहीम के नाम पर, यह कैसी करतूत।
ढोंगी की विसात यही, खुली आँख से देख-
तार तार तेरा हुआ, रे पाखंडी सूत।।-1
सच्चा सौदा नाम का, तक मंशा फलिभूत।
धर्म तुला की राक्षशी, फलती जस सहतूत।
गाल फुलाकर नाचते, मानो हो नटराज-
गुनो जेल में कैद हो, शिष्य तके नहिं पूट
महातम मिश्र ‘गौतम’ गोरखपुरी

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Author
Mahatam Mishra
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