दोहा छंदाधारित मुक्तक

*70वें स्वाधीनता दिवस पर दोहा मुक्तक शैली में देश को समर्पित एक रचना।*

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*माटी अपने देश की, इसमें बसती जान।*
*इसकी रक्षा मिल करें, देकर अपने प्रान।1*
*इसकी इज़्ज़त सब करें, करें न कोई क्लेश।*
*हिलमिल कर रक्षा करें, और बढ़ाएं शान।2*

*राग द्वेष सब भूल कर, मिल कर करें प्रयास।*
*बढ़े राष्ट्र में एकता, और देश का मान।3*
*अब प्रकाश नव प्रगति का, फैले चारों ओर।*
*लोग राष्ट्र निर्माण में, झोंकें अपनी जान।4*

*भारत माँ की शान में, दाग नहीं लग जाय।*
*मस्तक यह ऊंचा रहे, दें पूरा सम्मान।5*
*झंडा भारतवर्ष का , उच्च शिखर फहराय।*
*रक्षा ध्वज की हो तभी, जब सब हों कुर्बान।6*

*ज्वाला धधके प्रेम की, कर पूरा विश्वास।*
*टेढ़ी नज़र दुश्मन करे, लें उसका बलिदान।7*
*सीमा पर चौकस रहें, भूल गये दिन रात।*
*लांघे सीमा जो अगर, सैनिक लेंगे जान।8*

*आज प्रतिज्ञा हम करें, हमसे हो न भूल।*
*जियें मरें हम देश हित, प्रभु दो यह वरदान।9*
*अपने पीछे जग चले, इतना ऊंचा नाम।*
*जिस माटी से हम जुड़े, है उस पर अभिमान।10*
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*स्वधीनता दिवस की शुभकामनाएं,*
*????????जय हिंद????????*
*प्रवीण त्रिपाठी 15 अगस्त 2016*

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