दोहा ''काशी-कथा अनंत''

‘काशी-कथा’ अनंत

‘आर्यों’ का आना हुआ ‘सूर्यवंश’ का ‘वास’
‘गंगा’ के तट पर बसा ‘काशी’ का ‘इतिहास’

‘नाटे कद’ के ‘लोग’ थे और ‘साँवला’ ‘रंग’
‘कपड़े’ का ‘व्यापार’ था ‘चाँदी’ भी थी ‘संग’

‘चक्र प्रवर्तन’ ‘बुद्ध’ का ‘विश्वनाथ’ का ‘नाम’
‘शहर’ नहीं है ‘सभ्यता’ ‘काशी’ है ‘सुरधाम’

‘ठुमरी’ ‘टप्पा’ ‘चार-पट’ ‘लग्गी-लड़ी’ पुनीत
‘काशी’ ‘शहनाई’ ‘कथक’ ‘काशी’ खुद ‘संगीत’

‘तबला’ और ‘मृदंग’ है ‘काशी’ ‘ध्रुपद-धमार’
यह ‘गीता’ ‘गांडीव’ है यही ‘आज’ ‘अखबार’

‘काशी’ ही ‘केदार’ है यह ‘भैरव’ की ‘सिद्धि’
‘संकट मोचन’ ‘भक्त’ का ‘ज्ञानबोध’ की ‘ऋद्धि’

‘काशी’ ‘गंगा’ का बिछा फैला-फैला ‘पाट’
यह ‘चौरासी’ ‘योनियाँ’ यह ‘चौरासी’ ‘घाट’

‘रामानुज’ ‘रैदास’ यह ‘तुलसी’ ‘बुद्ध’ ‘कबीर’
‘नानक’ यह ‘चैतन्य’ यह ‘चन्दन’ और ‘अबीर’

‘काशी’ है ‘गोदौलिया’ ‘काशी’ ‘अस्सी घाट’
‘चेत सिंह’ का यह ‘किला’ यह ‘अशोक’ की ‘लाट’

‘काशी’ है ‘अध्यापकी’ यह ‘अध्यापन-पाठ’
‘गायन’ की ‘गामा किरण’ ‘अंक’ ‘एक सौ आठ’

‘काशी’ ‘पंडों का शहर’ ‘मन्दिर’ ‘भव्य’ ‘चरित्र’
‘काशी’ ‘जीवन-मौत’ की ‘भाषा’ एक ‘विचित्र’

विविध ‘देवियों’ का शहर ‘काशी’ है ‘शिवलिंग’
‘आस्थाओं’ की ‘एकता’ ‘स्त्री’ और ‘पुलिंग’

‘लक्ष्मीबाई’ का ‘शहर’ यह ‘मानस’ की छाँव
‘लालबहादुर शास्त्री’ ‘प्रेमचन्द’ का गाँव

‘मन्दिर-मस्जिद’ का शहर यह ‘सूफी’ यह ‘संत’
मजे ‘मजारों’ का शहर ‘काशी-कथा’ अनंत

‘काशी’ ‘पंडित’ ‘वैद्य’ है ‘विज्ञानी’ ‘विद्वान्’
‘काशी’ ‘मुल्ला-मौलवी’ यह ‘भभूत’ ‘भगवान्’

‘मंगलमय’ है ‘मंगला’ ‘साईं’ ‘दुर्गा-कुण्ड’
‘शिव की नंदी’ ‘नंदिनी’ ‘गणपति’ तुंडिल ‘तुंड’

‘काशी’ ही ‘कालीन’ है ‘काशी’ ही ‘जालान’
यह ‘सुहाग’ की ‘साड़ियाँ’ यह ‘बनारसी पान’

‘बोली’ भरी ‘मिठास’ की ‘काशी’ का है ‘तौर’
‘गायघाट’ कुछ और है ‘मदनपुरा’ कुछ और

‘काशी’ ‘व्रत’ ‘त्योहार’ है ‘काशी’ है ‘उपवास’
‘गंगाजल’ है यह ‘शहर’ ‘कण-कण’ ‘शिव’ का ‘वास’

‘काशी’ इक ‘आश्चर्य’ है ‘काशी’ है ‘साष्टांग’
‘काशी’ ‘ज्योतिष’ ‘ज्योतिषी’ ‘काशी’ है ‘पञ्चांग’

‘गमछी’ ‘गमछा’ यह ‘शहर’ ‘काशी’ है ‘लंगोट’
‘गंगाजी’ की ‘आरती’ ‘वैतरणी’ की ‘बोट’

‘काशी’ ‘शाश्वत नगर’ है इसकी ‘अद्भुत’ ‘राय’
‘सुबह-शाम’ की ‘बैठकी’ ‘फुटपाथों’ की ‘चाय’

‘भारतेंदु’ का यह ‘शहर’ ‘जयशंकर’ का ‘कोट’
‘काशी’ ‘हिन्दू’ ‘धर्म’ की ‘पूजा’ का ‘अखरोट’

‘प्रगति’ और ‘तकनीक’ का ‘काव्य-ग्रन्थ’ ‘काव्यांग’
‘काशी’ है ‘दिव्यांगना’ ‘काशी’ है ‘दिव्यांग’

‘परिभाषा’ से यह ‘परे’ ‘नमस्कार’ ‘परनाम’
‘काशी’ का ‘उपनाम’ है ‘जीने ही का नाम’

‘काशी’ ‘पान-गिलौरियाँ’ ‘काशी’ ‘कुल्हड़-दूध’
‘काशी’ है हर रोज ही ‘शूक-शनीचर-बूध’

‘काशी’ है ‘हरितालिका’ और ‘जलेबी’ ‘गर्म’
‘काजू की बरफी’ ‘दही’ ‘काशी’ का है ‘मर्म’

‘लस्सी’ ‘काशी’ ‘रसभरी’ ‘कुल्हड़’ ‘काशी’ ‘मीठ’
‘काशी’ कुछ ‘सम्मान’ है ‘काशी’ कुछ है ‘ढीठ’

‘लीटी-चोखा’ ‘भूख’ है और ‘नींद’ की ‘खाट’
‘काशी’ ‘गरम कचौड़ियाँ’ और ‘चटपटी चाट’

‘काशी’ ‘लहुरावीर’ है ‘काशी’ ‘तेलियाबाग’
‘पीलीकोठी’ ’लोहता’ ‘राधास्वामी बाग’

‘काशी’ ‘मैदागिन’ ‘वरुण’ ‘शिवपुरवा’ की धूप
‘काशी’ है ‘फुलवारिया’ ‘सिगरा’ ‘लंका’ रूप

‘काशी’ ‘दशाश्वमेध’ है ‘काशी’ ‘स्वर्ग-कपाट’
‘मगहर’ बसे ‘कबीर’ को ‘काशी’ लगी ‘उचाट’

‘काशी’ है ‘वाराणसी’ ‘रामनगर’ अभिराम
है ‘भैया बानारसी’ ‘जियो बनारस’ नाम

‘सारनाथ’ ‘भेलूपुरा’ ‘लुक्सा’ ‘मोतीझील’
काशी’ है ‘सूरज’ कहीं कहीं कहीं ‘कंदील’

‘मालवीय मोहन मदन’ ‘शिक्षा’ का ‘प्रतिमान’
‘काशी’ ‘विद्यापीठ’ है ‘काशी’ ‘गौरव-गान’

‘काशी’ ‘छत’ ‘आकाश’ है ‘काशी’ है ‘आदित्य’
‘काशी’ ‘भाँड़’ ‘बिदेशिया’ ‘काशी’ है ‘साहित्य’

शिवानन्द सिंह ‘सहयोगी’
मेरठ

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