कविता · Reading time: 1 minute

दोस्त

दोस्त
———
दोस्त हो
तो कहो
दिल में पड़ी
परतें खोलो
कुछ कही
कुछ अनकही

दोस्त हो
तो फूँको
एक सिगरेट
छल्लों के झरोथों
से देखो
मीठी यादों को

दोस्त हो
तो पढ़ो
मेरी आँखें
होंठों में छिपी बात
रेतकरवट का कुरेदना
करनट करनट रात

दोस्त हो
तो सुनो
आँसुओं से
लिखी कहानी
काँधे पर सर
आँखों का पानी
———————
राजेश’ललित’

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