Apr 12, 2020 · कहानी

++++++++++++++(( महफूज ))+++++++++++++

++++++++++++++(( महफूज ))++++++++++++++++
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अम्मी……. गले में बहुत दर्द हो रहा है… आहहहह…… बहुत दुख रहा है… खांसते खांसते बेहाल हो चुकी मुन्नी जोर जोर से रोने लगी। दर्द असहनीय होते होते कराहों में बदलते जा रहा था पांच साल की छोटी सी बच्ची का शरीर बुखार से तप रहा था । और थोड़ी दूर बैठी सलमा बड़ी मुश्किल से अपनी रुलाई रोके हुए बच्ची को ढांढस बंधाने की कोशिश में असहाय सी बच्ची के पास भी नहीं जा पा रही थी …. थोड़ा सबर कर बेटा …. तेरे अब्बू आते हैं… फिर दवाखाने चलते हैं .…. निगाहें बार बार दरवाजे की ओर उठ रही थी
तभी इकबाल बदहवास सा आया….. क्या हुआ ? ……सलमा ने पुछा।
अभी तक वहीं पुलिस वाले बैठे हैं और तलाश भी‌ तेज कर दी है ……… कुछ समझ नहीं आ रहा है क्या करुं ……? कैसे ले कर जाऊं दवाखाने…..?? मुझे देखते ही गिरफ्तार कर लेंगे …….जाने ही नहीं देंगे………. । या अल्लाह क्या करुं ……. कैसे अपनी बच्ची को दवाखाने लेकर जाऊं ….. बेचैनी बढ़ने लगी ।
कुछ दिन पहले मोहल्ले में आए डाक्टरों पर हमला करने वालों में इकबाल भी शामिल था । और सी. सी. टी वी कैमरों के फुटेज में उसकी शिनाख्त भी हो गई थी उनके स्केच भी जगह जगह लगे हुए थे पुलिस उन्हें पुरी मुस्तैदी से तलाश कर रही थी घर पर भी तलाशी हो चुकी थी पर इकबाल दोस्तों के साथ ही इधर से उधर छिपता फिर रहा था ।
बाहर निकलते ही मुझे गिरफ्तार कर लेंगे फिर तुम अकेले मुन्नी को कैसे लेकर जाओगी ।पैसे भी खत्म हो गए हैं … लेकर भी कैसे जाएंगे …… या अल्लाह मदद कर …..या मेरे मौला मदद कर … अब कभी ऐसा गुनाह नहीं करुंगा .
इधर मुन्नी की बढ़ती चीखें भी सलमा के कलेजे पर पत्थर पर पड़े हथौड़े की तरह चोट कर रही थी …..। सलमा मुन्नी को तड़पता देख आपा खो बैठी और खुद को रोक न सकी गुस्से में तमतमा कर बोली …… चाहे कुछ भी हो गुनाह किया तो सजा के लिए भी तैयार रहो अगर गुनाह किया है उससे भागते क्यों हो …….तब तो बड़े हीरो बने हुए थे शर्मिंदा होने की बजाय शेखी बघार रहे थे…. अंधे विश्वास में पड़ कर…… जो डाक्टर हमारी जान बचाने के लिए आए थे उन्हें ही मार मार कर भगा दिया पर ये कैसे भूल गए की उसकी लाठी में आवाज नहीं अल्लाह भी नेक बंदों का ही मददगार होता है…. तुम्हारे जैसे गुनाहगारों की नहीं …….तुम्हारे इस गुनाह की सजा आज मेरी बच्ची भुगत रही है तुम्हारा पुलिस से बचना जरुरी है या मुन्नी की जान बचाना । कैसे बाप हो तुम……..एक बात याद रखना अगर मुन्नी को कुछ हो गया तो तुम्हें कभी भी माफ नहीं करुंगी । गुस्सा धीरे-धीरे
आंसुओं में बदलने लगा ।
इकबाल सलमा से नजरें भी नहीं मिला सका .. तुम ठीक कह रही हो चलो मुन्नी को दवाखाने ले चलते हैं ठहरो , पहले अपने आप को कवर करो … …. फिर मुन्नी को गोद में उठाओ ..चादर से अपने आप को कवर करके मुन्नी को गोद में उठा कर बाहर निकल गया …सलमा भी पीछे भागी पैसे नहीं ….कोई साधन नहीं कैसे पहुंचेंगे कुछ समझ नहीं आ रहा था।
किसी तरह लगभग भागते हुए इसी चिंता में डूबे चौक तक पहुंचे । देखते ही पुलिस वालों ने रोका …. ए …रुको कहां जा रहे हो तुम लोग….. बच्ची की तबियत खराब हो गई है साहेब दवाखाने ले जाना है….. सलमा ने भरे गले से कहा ….. कैसे जाओगे रुको ……इधर आओ इंस्पेक्टर ने अपने पास बुलाया । इकबाल का मुंह ढंका होने के कारण शक हुआ चेहरा दिखाओ …… इंस्पेक्टर ने कहा ।
और इकबाल के तो मानो घबराहट से हाथ पैर फूलने होने लगे …. चादर चेहरे से हटाते ही…. अरे ये तो वही है जिसने डाक्टरों पर हमला किया था ,पकड़ो साले को डाल दो वैन में और कालर पकड़ घसीटते हुए लेकर जाते जाते दो चार झापड़ जड ही दिए और वैन में डाल दिया ।
तुरन्त मुन्नी को सलमा ने अपनी गोद में ले लिया और इंस्पेक्टर की ओर भागी ….. साहेब, इसे छोड़ दीजिए साहेब… बच्ची को दवाखाने ले जाना है ….मैं अकेले कैसे ले जाऊंगी साहेब रहम कीजिए…… तुम इसकी चिंता मत करो बहन हम तुम्हें अस्पताल जीप में भेज देते हैं ।
ये वापस आकर खुद को गिरफ्तार करा देगा इसे साथ जाने दें साहेब ..…. इंस्पेक्टर भी इंसान ही था …. उसे भी अकेली औरत की मजबूरी समझ आ गई । इसे भी साथ ले जाओ और बच्ची का ट्रिटमेंट शुरू हो जाए तो इसे गिरफ्तार कर थाने छोड़ आना । सलमा ने हाथ जोड़कर इंस्पेक्टर का शुक्रिया अदा किया और जीप में बैठ रवाना हो गए
अस्पताल पहुंचते ही नाम पता आदि फार्मेलीटी होते ही तुरंत इलाज शुरू किया गया । यह पता चलने के बाद भी कोई फर्क नहीं पड़ा की वो मुसलमान है या हिन्दू कोई फर्क नहीं …… कोई भेद भाव नहीं…..सभी के साथ एक सा व्यवहार देख चेहरे पर शर्मिंदगी के भाव उजागर होने लगे । देखा , तुम लोग जिन्हें अपना दुश्मन समझ रहे थे वहीं किन्हीं फरिश्तों की तरह मुन्नी को बचाने की कोशिश में जुटे हैं….. ये फ़रिश्ते नहीं तो और क्या है….। हां सलमा कितनी बड़ी गलतफहमी में जी रहे हैं हम सब कितनी बड़ी बेवकूफी कर रहे हैं …..जो इन फरिश्तों को ग़लत समझ रहे हैं अपनों ही के बहकावे में आकर अपनी बच्ची को भी इस हाल में पहुंचा दिया ……….मुझसे बड़ा गुनाहगार कौन होगा ……। तभी डाक्टर ने आकर ढांढस बंधाया ….. चिंता मत करो सब ठीक हो जाएगा …….. ‌‌। शुक्रिया डाक्टर साहेब आपका ये एहसान जिंदगी भर नहीं भूलूंगी । तभी डाक्टर की नजर इकबाल पर पड़ी ….. अरे तुम तो वहीं हो ना जो उस रोज़ हमसे बहस कर रहे थे …. और हम पर हमला किया था । उस रोज यदि बिटिया का चेकअप हो जाता तो आज इतनी ज्यादा हालत इतनी क्रिटिकल नहीं होती ।हम तुम्हारे दुश्मन नहीं है हमारे लिए पेशेंट सिर्फ पेशेंट है हिन्दू या मुसलमान नहीं ……. । मुझे माफ़ कर दीजिए डाक्टर साहेब मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई । कोई बात नहीं सब ठीक हो जाएगा आप लोग फिक्र ना करें।
चलिए हवलदार साहेब अब मुझे कोई फ़िक्र नहीं है मेरी बच्ची अब महफूज हाथों में है। चेहरे पर संतोष की लकीरें नजर आने लगी थी डर और खौफ तो न जाने कहां उड़न छू हो गए थे।
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* गौतम जैन *

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ग़ज़ल , कविता , हाइकु , लघुकथा आदि लेखन प्रकाशित रचनाएं:--- काव्य संरचना, विवान काव्य...
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