मुक्तक · Reading time: 1 minute

*दोस्ती*

दोस्ती का रिश्ता कभी पुराना नहीँ होता
ख़त्म कभी भी ये अफ़साना नहीँ होता
बड़ी पाकीज़गी है इसमें पाई, वरना
आज हमारे लबों पर ये तराना नहीँ होता
*धर्मेन्द्र अरोड़ा*

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