शेर · Reading time: 1 minute

दोस्ती ज़िंदगी से।

जब जहाँ भी हो सके,
जी भर के मस्ती कर लो,
यही तो एक ज़िंदगी है दोस्त,
हो सके तो इससे दोस्ती कर लो।

-अंबर श्रीवास्तव।

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लहजा कितना ही साफ हो लेकिन, बदलहज़ी न दिखने पाए, अल्फ़ाज़ के दौर चलते रहें, ये सिलसिले कभी ना रुकने पाएं, कोशिश यही रहेगी मेरी, कि दिल किसी का ना…
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