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दोष यूँ देना

डॉ मधु त्रिवेदी

डॉ मधु त्रिवेदी

कविता

August 22, 2016

दोष यूँ देना आम है तेरा
पाठ पढाना भी आम है तेरा

रोशनियाँ जब बुझ चुकी है सब
अब सोना भी काम है तेरा

तू मय पिलाता कंजूसी से
गुलजार भी हर शाम है तेरा

सारे भटके आ जाओ वापस
करने को काम तमाम है तेरा

ऐसे क्यूँ भूला बैठा है तू
करना बाकीै इन्तजाम है तेरा

अब हो गई है देर तुझे बहुत
सँजने को बाकी काम है तेरा

बेखबर है पडोसियों से तू
फिर होगा देश गुलाम है तेरा

अकेले चला सरहद पे तू
हर शाम हुआ हराम है तेरा

हुआ मनमौजी हरामखोर तू
नाकाम हुआ मुकाम है तेरा

गया जब तू मयशाला को
बदनाम हुआ नाम है तेरा

तूने की करतूत कोई खास
मधु हुआ नाम बेनाम है तेरा

Author
डॉ मधु त्रिवेदी
डॉ मधु त्रिवेदी प्राचार्या शान्ति निकेतन कालेज आगरा स्वर्गविभा आन लाइन पत्रिका अटूट बन्धन आफ लाइन पत्रिका झकास डॉट काम जय विजय साहित्य पीडिया होप्स आन लाइन पत्रिका हिलव्यू (जयपुर )सान्ध्य दैनिक (भोपाल ) सच हौसला अखबार लोकजंग एवं ट्र... Read more
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