कविता · Reading time: 1 minute

दोष बिच्छू का नहीं…

दोष बिच्छू का नहीं…
की उस ने हमें काटा,
‘जहर’
हमारे शरीर में फैलाया,
काटना और ज़हर फैलाना
धर्म है उसका …
वो अपने धर्म पे था,
दोष हमारा है…
हमने उसके छद्म स्वरूप
को नहीं समझा,
उसकी रेंगने और बिलबिलाने को
दया और प्रेम से देखा
उठाया, अपने दामन में संभाला
अब जहर नस-नस में है
उपचार और बिच्छू से दूरी
हमारा धर्म है …

***
19-04-2019

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