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दोपहर बनकर अक्सर न आया करो

रवीन्द्र सिंह यादव

रवीन्द्र सिंह यादव

कविता

January 25, 2017

दोपहर बनकर अक्सर न आया करो।

सुबह-शाम भी कभी बन जाया करो।।

चिलचिलाती धूप में तपना है ज़रूरी।

कभी शीतल चाँदनी में भी नहाया करो।।

सुबकता है दिल यादों के लम्बे सफ़र में।

कभी ढलते आँसू रोकने आ जाया करो।।

बदलती है पल-पल चंचल ज़िन्दगानी ।

हमें भी दुःख-सुख में अपने बुलाया करो।।

दरिया का पानी हो जाय न मटमैला।

धारा में झाड़न दुखों की न बहाया करो।।

– रवीन्द्र सिंह यादव

Author
रवीन्द्र सिंह यादव
हिन्दी कविता, कहानी,आलेख आदि लेखन 1988 से ज़ारी. आकाशवाणी ग्वालियर से 1992 से 2003 के बीच कविताओं, कहानियों एवं वार्ताओं का नियमित प्रसारण. नवभारत टाइम्स . कॉम पर 'बूंद और समंदर' अपना ब्लॉग. ब्लॉगर . कॉम पर 'हिन्दी-आभा*भारत'(http://www.hindi-abhabharat.com), हमारा आकाश(https://hamaraakash.blogspot.com),https://ravindrasinghyadav.wordpress.com... Read more
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