कविता · Reading time: 1 minute

देश मेरे …..+

वीर हमारे कम ना हो,
ये हमने भी मन में ठानी थी।
घर घर में पैदा *भगत करे,
*सुभाष *आजाद बनबानी थी।
विचलित दुश्मन देख उसे हो,
ऐसा वीर वीरांगनाएं थी।
मुट्ठी पर रख पत्थर उसे,
कर देती वो पानी थी।।
वीर हमारे काम ना हो
ये हमने भी मन में ठानी थी।।।।
ये हमने भी मन में ठानी थी।।।

बिमल रजक
(8002287431)

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