देश भक्ति ग़ज़ल

221 1222 221 1222

ये खून खराबा अब स्वीकार नहीं होगा
गर वार किया तुमने इंकार नहीं होगा

ये बंद करो नाटक जो खेल रहे हो तुम
आतंक तुम्हारा ये स्वीकार नहीं होगा

वो वार करेंगे हम ये पाक ज़रा सुन ले
देखा कभी तूने ऐसी मार नहीं होगा

जब जान गवाई है इस देश पे वीरों ने
बलिदान शहीदों का बेकार नहीं होगा

अब बात नहीं करना तुम पाक लड़ाई की
गर वार किया हमने अवतार नहीं होगा

धोखे से छला तुमने सोये हुए शेरों को
इक बार हुआ जो भी हर बार नहीं होगा

तुम एक को मारोगे हम चार गिरायेगें
हम लाश बिछा देंगे, संसार नहीं होगा

तुम प्यार से गर मांगो हम खीर तुम्हें देंगे
कश्मीर अगर मांगो स्वीकार नहीं होगा

बी0 आर0 महंत

Like 1 Comment 0
Views 6k

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share
Sahityapedia Publishing