देश प्रेम

जन्म लिया जिस देश में,
मानों सदा उसका आभार,
मातृभूमि जो बनी हमारी,
वह धरती प्रेम की हकदार!

जिसने जगत में दिलाई हमें
भारतवासी होने की पहचान,
चुका नहीं सकते किसी भी यत्न से,
उस पुण्यथली भारत माँ के एहसान!

दुश्मन के आतंक के आगे कभी
झुक न पाए वफादारी-ईमान,
देश की सुरक्षा से ज़्यादा बढ़कर,
होता नहीं कोई गौरव-अभिमान।

जाति-धर्म की बात न हो कोई,
राष्ट्रधर्म को समझें सर्वोच्च महान,
व्यक्तिगत स्वार्थों से ऊपर हटकर
देश का सर्वथा सोचें कल्याण ।

देश प्रेम की लौ जलाकर मन में,
राष्ट्रीय एकता का सब करें आह्वान,
हर भारतीय हो देश का सजग प्रहरी
कर न पाए कोई आंतरिक-बाहरी नुकसान।

मत खींचो नफरत की दीवारें,
धर्म -मज़हब की न चले दुकान,
कानूनी दायरे में रहकर ही बाँटें
स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति व अधिकारों का ज्ञान!

जन-मानस के हृदय में सदा गूँजें
राष्ट्रीय हित व मानवता के स्वर-तान
जन्मभूमि के सब वंशज मिलकर
करें जोश से देश प्रेम का गुणगान!
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खेमकिरण सैनी
बेंगलूरु
29.02.2020

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