देश को समझें अपना

कुंडलिया
अपना यह संदेश तुम, फैला दो हर ओर।
दीप जलाओ ज्ञान का, थाम़ प्रेम की डोर।।
थाम़ प्रेम की डोर, प्रीत पथ कदम बढ़ाना ।
आये खाली हाथ, सभी को खाली जाना ।।
कह “अरशद” कविराय, देखते सब यह सपना।
मिल जुल रहवैं साथ , देश को समझें अपना।।
@ अरशद रसूल

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like 1 Comment 0
Views 11

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share