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देश के वीरों के लिए

आलोक प्रतापगढ़ी

आलोक प्रतापगढ़ी

कविता

January 27, 2017

मेरी कविता देश के वीरों को समर्पित है।

ना धन चाहिए, ना रतन चाहिए।
हमको, पूरा मेरा वतन चाहिए।।

कट गये जिनके सर, इस वतन के लिए।
ऐसे वीरों का हमको, संग चाहिए।।

माँ के चेहरे पर ना, कोई शिकन चाहिए।
बेटियों की भी आँखें ना, नम चाहिए।।

मिट गये देश के लिए, जो हँसते हुए।
ऐसे देश में हमको, जनम चाहिए।।

ना धन चाहिए, ना रतन चाहिए।
हमको, पूरा मेरा वतन चाहिए।।

कवि: आलोक सिंह प्रतापगढ़ी

Author
आलोक प्रतापगढ़ी
कवि आलोक सिंह प्रतापगढ़ी
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