कविता · Reading time: 1 minute

नेता तेरी महिमा है अपरंपार

हे नेता तेरी महिमा है अपरंपार
तुझसे ही चलती इस देश की सरकार

तू चुनाव के समय जनता का हाथ जोड़ता है
तू गरीबों के सामने “कटोरा” लेकर भीख माँगता है
तू “महान भिखारी” की श्रेणी में आ जाता है

नेता बन कर तू
उसी जनता का कमर तोड़ता है
उसी गरीब का दिल तोड़ता है।

हे नेता तेरी महिमा है अपरंपार
तेरे कर्मों को देख जनता है लाचार
यह भुखमरी- गरीबी तेरा ही देन है
इसी भुखमरी- गरीबी से चल रहा तेरा रेल है।

हे नेता तेरी महिमा है अपरंपार
तू चुनाव जीत जाता है
सबसे पहले अपनी जेब भरता है
तेरा नाम सच्चे “भ्रष्टाचारी नेता” में आता है
तू “महंगाई” को बढ़ाता है

हे नेता तेरी महिमा है अपरंपार
हे नेता तू दिखाता है चमत्कार
एक छोटी सी शराब के शीशी के दम पर
बन जाता है तेरी सरकार।

हे नेता तेरी महिमा है अपरंपार
तेरे चमचे तेरे गुणगान है करते
तेरे चमचे “भीख” माँग कर पेट है भरते
तेरे चमचो की हो जय जयकार।

हे नेता तेरी महिमा है अपरंपार
हे नेता तेरी महिमा है अपरंपार।

प्रेम से बोलो
नेता के “भिखारी चमचों” की जय
देश के “महान भिखारी” नेता की जय
देश के “महान भ्रष्टाचारी” नेता की जय।।।

राकेश कुमार राठौर
चाम्पा (छत्तीसगढ़)

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