देश के नाम चार शेर

१, ऐ वतन ! मुझे तुम पर नाज़ है ,
की तुम्हारी सर ज़मीं पर अमर शहीदों ने जन्म लिया.
मगर यह भी अफ़सोस की है बात ,
इसी ज़मीं पर गद्दारों ने भी जन्म

२, ऐ फरिश्तों ! तुम क्या सजाओगे अपने जन्नत को ,
हमारे प्यारे वतन को तो अमर शहीदों ने अपने खून से सजाया है .

३, अपनी गरज के लिए तो बहुत आसां है जीना और मर जाना ,
अपने वतन के लिए जो मरे ,सही में वही है जिंदगी .

४, गुलिस्तां में गुलाब जैसा कोई हसीं फूल नहीं होता,
सारी दुनिया में अपने वतन जैसा कोई घर नहीं होता.

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