देश का विकास हो....

: *◆देवहरण घनाक्षरी◆*
विधान :~ ८,८,८,९ वर्णों पर यति ,चार चरण समतुकान्त, चरणांत तीन लघु।(१११)
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हिन्दी बने राज भाषा,
सबकी है अभिलाषा,
मिल के करे प्रयास ,होंगे हम तब सफल।

विश्व बन्धु भाव जगे,
धरा परिवार लगे,
किसी को भी होवे कष्ट,आँख अपनी हो तरल।

दलितों का भाव तजे,
सारे मिल करें मजे,
किसी को दिखाये मत,कहीं कोई निज बल।

देश का विकास होवे,
धैर्य नहीं जन खोवे,
हर्ष चहुँ दिश फैले,”आस” मत हो विकल।
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कौशल कुमार पाण्डेय “आस” द्वारा रचित।
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