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देश का मजदूर,निकला होकर है मजबूर –आर के रस्तोगी

देश का मजदूर,होकर निकला है मजबूर |
कारण बताता हूँ तुम्हे,सुनो तो मेरे हजूर ||

सारे देश में लाँग डाउन हो चूका था |
उसको काम मिलना बंद हो चूका था ||
मकान मालिक घर खाली करा रहे थे |
उसको वे अपने मकान से भगा रहे थे ||
उसका न कोई काम,न कोई ठिकाना था |
बच्चे मांग रहे भूखे पेट के लिये खाना था ||
इन परिस्थियो में वह हो गया था मजबूर |
देश का मजदूर होकर, निकला है मजबूर ||

दिल्ली बोर्डर मजदूर क्रॉस कर रहे थे |
बीबी बच्चे भी उनके साथ चल रहे थे ||
कुछ सामान उनके कंधो पर लदा था |
न पैरो में चप्पल,न सिर पर पगा था ||
पुलिस भी ऐसे में कुछ न कर पा रही थी |
उनको किसी तरह से न रोक पा रही थी ||
हजारो की संख्या में ये बेबस थे मजदूर |
देश का मजदूर निकला होकर है मजबूर ||

आर के रस्तोगी
गुरुग्राम

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