देश का भविष्य

छोटे-छोटे बच्चों तुम बैठ कर सोचो तुम।
बड़े होकर देश के लिए क्या करोगे तुम।।

माता-पिता ने पढ़ने के लिए तुम्हें भेजा स्कूल,
तुने प्यार से सिच – सिच कर लगाया एक फूल।
डब्बे से रोज रोज तूने जो फुल में पानी पटाई,
ओ फूल देखो सुगंध की भरी जवानी लाई।।
उसी तरह तुम भी अपनी जवानी को निखारो,
देश के लिए अपनी तुम कुछ करके दिखाओ।।।
छोटे-छोटे बच्चों तुम बैठकर सोचो तुम।
बड़े होकर देश के लिए क्या करोगे तुम।।

उस फूल पर देखो तुम कितने भंवरे मंडराते,
फिर भी उस सूल की सुगंध कभी नहीं ओराते।
जब फूल मुरझा जाता तो फिर से नई कली खिलता,
पर उन भवरों को ओ कभी निराश नहीं होने देता।।
उसी तरह तुम कुछ कर जाओ कि नाम तुम्हारा अमर हो जाए,
जब तुम्हारी याद किया जाए तो नई सुगंध लेकर आए।।।
छोटे-छोटे बच्चों तुम बैठकर सोचो तुम।
बड़े होकर देश के लिए क्या करोगे तुम।।

कवि – जय लगन कुमार हैप्पी

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