Mar 1, 2019 · लघु कथा
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देशभक्ति का जज़्बा

“वो बहुत किस्मत वाले होते हैं, जिन्हें खोने के बाद भी अपने मिल जाते है । वरना उनकी एक एक आहट सुनने को कान तरस जाते है । ”

65 साल की रमा कुछ यूँ ही सोच रही थी । उसका बेटा कपिल देश सेवा का जज़्बा लिए सेना में गया था , जाते समय उसने कहा था :
” माँ आज मेरे ऊपर एक और भारत माता की जिम्मेदारी आ गयी है मैं दोनों माँ की सेवा मुस्तैदी से करूँगा ”

माँ ने आशीर्वाद देते हुए कहा था :
” बेटा मेरी चिंता मत करना भारत माँ का मान रखना , तेरी हर आहट, हर यादें मेरे दिलो-दिमाग में बसी है ।”

आज कपिल युध्दबंदी है , और रमा को उम्मीद है ईश्वर और सरकार की कूटनीति पर ।

रात के एक बजा होगा एक आहट हुई रमा की
आँख खुली । दरवाजे पर दस्तक हो रही थी ,
उसने दरवाजा खोला , सामने विजयी मुस्कान के साथ कपिल खड़ा था ।

स्वलिखित लेखक संतोष श्रीवास्तव
भोपाल

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Santosh Shrivastava
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