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*देशप्रेम*

Dharmender Arora Musafir

Dharmender Arora Musafir

मुक्तक

July 29, 2017

फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुन
2122 2122 212
इस वतन से प्यार करना सीखिए !
ये चमन गुलज़ार करना सीखिए !
पाक की नापाक हरकत देखकर,
हौंसले अंगार करना सीखिए !
:::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::
फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुन
2122 2122 212
आसमां पर था वतन जो छा रहा !
आज उसको क्या हुआ ये जा रहा !
हरकते वो कायराना कर रहे ,
जाने’ क्यूँ है खौफ़ उनसे खा रहा !
:::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::
122 122 122 122
फ़ऊलुन फ़ऊलुन फ़ऊलुन फ़ऊलुन
सलामत है’जिनसे वतन ये हमारा !
बिना उनके’होता नहीं है गुज़ारा !
सभी मुस्कुराते उन्हीं की बदौलत ,
न अपमान उनका हमें अब गवारा !
:::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::
1222 1222 1222 1222
मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन
दिलों में आदमी के जब बसा ईमान होता है !
वहीं पर राम है मिलता वहीं रहमान होता है !
शगुफ्ता सा वतन मेरा निराली शान को रखता ,
शहीदों की शहादत का यहाँ सम्मान होता है !
:::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::
धर्मेन्द्र अरोड़ा “मुसाफ़िर”
9034376051

Author
Dharmender Arora Musafir
*काव्य-माँ शारदेय का वरदान *
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