मुक्तक · Reading time: 1 minute

देश,परिस्थिति और काल

देश,परिस्थिति और काल का
जिसको रहता ज्ञान,
साहस, शोर्य जगाने का ही, जो करता अभियान,

वैसे तो वह सरल प्रकृति का,
प्राणी है पर-
कवि मिटता है आन,वान पर
यह उस पहिचान

70 Views
Like
229 Posts · 8k Views
You may also like:
Loading...