Mar 28, 2020 · कविता

देर कर देता हूं मैं

(देर कर देता हुं मै)
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सुर्योदय की लाली से
भोर की छटा मतवाली से
पंछियों की चहचहाहट से
इन सबसे वंचित रह जाता हुं मै
क्योंकि
सो कर उठने में देर कर देता हुं मै ।

मानसिक तनावों से
व्यर्थ की चिंताओं से
पूरे दिन की उलझनों से
गहरी नींद से वंचित रह जाता हुं मै
क्योंकि
रात को सोने में देर कर देता हुं मै ।

कार्य के जुनून में
जरा सी लापरवाही से
अपनों को अनदेखा कर
बच्चों की मुस्कान से वंचित रह जाता हुं मै
क्योंकि
रात घर आने में , देर कर देता हुं मै ।

माता पिता के पांव छूने से
बच्चों के अच्छे संस्कारों से
पल पल के सिमटते रिश्तों की
छोटी छोटी खुशियों से वंचित रह जाता हुं मै
क्योंकि
अपनों से माफी मांगने में देर कर देता हुं मै ।

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” गौतम जैन “
हैदराबाद

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