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देयर इज एन ऑलपिन [ दोहा-शतक ] +रमेशराज

कवि रमेशराज

कवि रमेशराज

दोहे

October 4, 2016

यूँ हम पर हावी हुई अँगरेजी लेंग्वेज
नॉट इन्डियन, नाउ वी आर एज अंगरेज। 1

आज विदेशी वस्तु का मचा हर तरफ शोर
ऑल आर सिंगिग फ्री ‘ये दिल माँगे मोर’। 2

छल-सम्मुख बेबस हुई नैतिकता ग़मगीन
चीटिंग इज इन इण्डिया यूनिक-एवरग्रीन। 3

गीतों से गायब हुई मृदुलय-मोहक टेक
स्वीट रिलेशन नाउ इज इन ए सॉरो-लेक। 4

संवेदन-सद्भावना जग में आज दिखै न
हू विल सी सच ट्रैजडी लाइफ इन हयूमैन? 5

उत्तर देने के लिये सजे यहाँ पर हाट
फाइन्डिंग बट ऑनली ‘देयर-‘व्हेयर, व्हाट’। 6

पद वंचित हैं कर्म से कोई क्रिया दिखे न
हीयर वॉयस ऑनली ‘बिगनिंग, बिगिन, बिगेन’। 7

घात और प्रतिघात में डूबा यह संसार
चूज़ ऑल वी ट्रेजडी, वान्ट ऑल वी वार। 8

पति-पत्नी हैं साथ पर घर में मुखरित मौन
इट होरेबल ट्रेजड़ी बोथ आर एलोन। 9

पररक्षा-करुणा-दया, समय गया सब लील
ऑवर फीलिंग फॉरमल और एज स्टील। 10

उसकी ही अब वन्दना उसकी ही तारीफ
हू इज इन सिन टोटली, बोगस, चीटर, थीफ। 11

होना है हर हाल में उन खुशियों का खून
देयर इज एन आलपिन नीयर ए बैलून। 12

इस युग में आदर्श का सत् आलोक दिखे न
कल्चर इज मच डस्टफुल टूडे वन्स अगेन। 13

त्रासदियों के बीच में उम्र रही यूँ बीत
एज टंग इन दा मिडिल ऑफ क्लैवर टीथ। 14

रक्षा-बंधन निरर्थक, फीकी भइया द्वौज
नॉट रिलेशन बट मनी पॉवरफुल बीकौज। 15

क्रान्तिकारिता के गये सब विचार हम भूल
फायर इज कम्पलसरी, बट हीयर इज कूल। 16

या तो रेगिस्तान हम, या हैं सूखे ताल
सच कंडीशन नॉट बी एज रिवर-कैनाल। 17

दिखें तमाशे हर जगह अब हैरतअंग्रेज
बैडवर्क इन दी सिटी टाउन एण्ड विलेज। 18

बाहर से आदर्श हम, भीतर से संगीन
सीनेबल वी एज मच, सो मच वी अनसीन। 19

खानों में क्या बँट गये भोले राम-रहीम
नाउ बोथ माइन्ड इज फुल विद क्रूअल थीम। 20

घर के मुखिया हों जहाँ अति विक्षिप्त हकीम
हाउस इज अनसेफ मच औन क्रेकफुल बीम। 21

एक-दूसरे के बने हम सब अब आखेट
ऑल इन्डिया इज लिविंग बिद अनब्रोकन हेट। 22

दीप सरीखा आचरण तम के बीच दिखे न
इट इज ऑवर प्रोबलँब, इट इज ऑवर पेन। 23

व्यभिचारी पति साथ में लूटे मज़े रखैल
हिज वाइफ इज़ नाउ इन अनटोरेबल हैल। 24

माया के सँग मद बढ़े, बनें असुर-सम देव
दो पावरफुल इज मनी बट इट किल्स बिहेव। 25

जिस समाज में नित रहे आडम्बर की धूम
देयर ट्रुथ-रीयेलिटी हू विल से टू हूम। 26

सच को व्यंजित कर रहे यूँ हम सब डरपोक
लाइट थिंकिंग इज सुपर, डीपनैस विद जोक। 27

हर सच्चे संवेद से लोग हुए महरूम
ऑवर ऑल विहेव इज पार्ट ऑफ परफ्यूम। 28

हर कोई मिलता यहाँ चतुर सयाना चंट
आईडियल-बिगेरियस इज इन मच स्टंट। 29
जिधर न कोई छल-कपट, उधर निकाले खोट
व्हाई इज ही नॉट लुक ओन सीरियस ब्लोट? 30

माना प्रतिभावान् वह, लेकिन शुभ सूझे न
पेन ऑनली गिव्स अस हर फरटाइल ब्रेन। 31

अपनी अन्तिम साँस तक भले करे वह खर्च
ही विल गेन नथिन्ग इन प्रोस्टीट्यूट रिसर्च। 32

कुछ तो हो, खाली बिके ‘किन्तु’ ‘परन्तु’ न हाट
बट यू से बट मोर बट, दिस बट-बट इज व्हाट? 33

जो गीली हैं लकड़ियाँ उन्हें न व्यर्थ घसीट
इन दिस प्रोसज श्यौरली नो फायर नो हीट। 34

सदा करे सत् प्रेम की आडम्बर तौहीन
ऑल वान्ट लवली सुगर नॉट एज सैक्रीन। 35

धूप-छाँव दिन-रात की यह गुत्थी सुलझे न
इन दा लाइफ-साइकिल इफ प्लैजर, टू पेन। 36

सही बात की वह करे सदा काट की काट
ओ.के. ओ.के. सेज ही, बट ओ.के. इज व्हाट। 37

गाने से मतलब हमें बस प्रशस्ति के सोन्ग
अनलकली वी नॉट नो हू राइट हू रोन्ग। 38

धन के बल पर वे बने माननीय वैल्यूड
अदर थॉट इज दैट दे सेमलैस मच न्यूड। 39

वह खुश आज उतारकर अपनी सारी शर्म
प्रोस्टीट्यूटिंग नाउ इज हिज टोटल कन्फर्म। 40

फूल-पत्तियों की तरह जिया न ज्यादा प्रेम
एट लास्ट बीकेम इट लाइक ए स्टेम। 41

वह बेचे छल से भरा गली-गली में सेंट
वी केन टू टैल हिम ऐरोटिक मरचेंट। 42

मचा रहे इस देश में चहुँ दिश उल्लू धूम
रेज ऑफ दा सन हिडन, नाउ डीपफुल ग्लूम। 43

अजगर से जिनके हुए बन्धु आज मुँह-पेट
ऑल आर डैमॉन बट, कॉल एज दा ग्रेट। 44

जिन्हें भा रहे आजकल सत्ता के अभिषेक
नो डाउट कन्फर्म इट ऑल आर इस्नेक। 45

कोई भी पढ़ता नहीं उसके मन के पेज
ऑल प्लीज विद ऑनली हर स्किन लेंग्वेज। 46

दुःख के बादल से अलग कोई दृश्य दिखे न
वैन्ट नाउ विन्टर समर, हिज आइज इन रेन। 47

छल ने यूँ तममय किया उसका भावालोक
ही इज नॉट इमोशनल इन सोशल स्टोक। 48

श्रम के बदले आजकल सबको भाती लूट
इन ऑवर सोसायटी ऑनेस्टी इज हूट। 49

नायक की उफ् किस तरह बदली आज इमेज
नाउ किलर इज कैप्टन, डिक्टेटर इन क्रेज। 50

झेल रहा है आज वह अति टूटन, संत्रास
हूज इमोशन प्यौर मच, हूज हार्ट इज ग्लास। 51

अब गहरे दुःख में कहीं मिलें न सुखद रिमार्क
प्लीज कीप ए केन्डल इन दिस फीलिंग डार्क। 52

हमसे मिलना हो अगर, मिलना सहज सहर्ष
हिप्पौक्रेसी, डिसप्ले गिव अस वैरी कर्स। 53

राजनीति में संत की करतूतें देखो न?
ऑल क्रोज ही इज किलिंग विद सिंगल स्टोन। 54

माथे पर टीका दिपे, तन पर चन्दन लेप
विद सिस्टर डॉटर मदर हू डज एवर रेप। 55

बाँटें आज समाज में बनकर संत असीम
ऐरोटिक ओपीनियन एण्ड सेक्सुअल ड्रीम। 56

आँखों के अब सामने मच ब्लोटैड रिब्यूज
इन दिस टाइम थॉट इज अनडाउटफूल हूज? 57

पूजा उनकी आज जो रहे देश को लूट
इन दिस टाइम एवरी बोगस इन सैल्यूट। 58

अजगर-सा मुँह वह लिये, पेट बना ज्यों टेंक
इन दिस टाइम दैट हू इज विद ऐनी रेंक। 59

दुःख के इस माहौल में खुलें न सुख के पेज
व्हेयर लवली ड्रीम इज? व्हेयर लवली डेज? 60

एक तरफ सुख तो वहीं दुःख हैरतअंगेज
व्हेयर ए पैलेस इज, देयर टू कॉटेज। 61

पश्चिम ने हमको दिया एरोटिक रोमांस
नाउ ऑल वी फॉल इन डांस डांस मच डांस। 62

अधरों पर मुखरित नहीं आज क्रान्ति के रंग
इन दिस सिस्टम ऑल वी आर विदाउट टंग। 63

पूँजीवादी व्यवस्था या सत्ता की देन
डाउट, सौरो, टेंशन, अनटोरेबल पेन। 64

निर्दोषों के पक्ष में अब कानून दिखे न
इट सिस्टम डज ओनली वरशिप ऑफ विलेन। 65

नयी सभ्यता के पड़े अजब यहाँ पर पाँव
कूकू इज इन कन्ट्री सिंगिंग काँऊँ काँव। 66

जब से उनको मिल गये सत्ता के ताबीज
वेरी-वैरी ग्लैड दे, वैरी-वैरी प्लीज। 67

कमलनाथ जब से हुए सत्ता के सिरमौर
प्लीज नाउ यू टैल मी, हू इज फिट सीक्यौर? 68

घृणा-द्वेष के रंग वे जन पर रहे उलीच
वैरी डर्टी लीडरी, पोइजनस इस्पीच। 69

निर्दोषों पर पुलिस की लातें करें कमाल
पब्लिक इज इन कन्ट्री लाइक ए फुटबॉल। 70

कट्टरपन, धर्मान्धता , जातिवाद के खेल
इट हैपिन इन इण्डिया एट लार्ज स्केल। 71

हमको सिखलाने लगे आज विदेश तमीज
लॉक आफ आवर प्ले विद अमेरिकन कीज। 72

ख्वाब सुनहरे दे बहुत विश्वबैंक या गैट
व्हेयर इज सम कोन सच, देयर इज ए नैट। 73

हर नेता दिखला रहा बस सत्तायी खेल
फुल विकेम मोरेलिटी थिंग ऑफ दा सेल। 74

सत्ता में रह दे हमें सिर्फ कष्ट ही कष्ट
ही इज लीडर दैन हिज एव्रीथिंग अनजस्ट। 75

चमचों से चलते यहाँ सब सत्ता के खेल
सो अनफिट इज देट हू हेज नाउ नो टेल। 76

मंदिर की इत गोट है, उत मस्जिद के कार्ड
पॉलटिक्स इज नाउ मच बोगस टाइमवार्ड। 77

सत्ता पाने के लिये अब वे एप्लीकेंट
हूज आर अनसीरियस क्र्रूअल एलीफेंट । 78

आज जिधर भी देखिए सबके सब हैं ग्रेट
इन दा फोकस नाउ इज डैमन-हिप्पोक्रेट। 79

जनता है खरगोश-सी बदहवास-बदहाल
लीडर इज इन कन्ट्री फॉक्स एण्ड जैकाल। 80

जीत सुनिश्चित है नहीं भले आप हों तोप
देट नॉट सरटेनली फोर एज यू होप। 81

आज शिकारी वह अगर, कल होगा आखेट
हू इज टाकिंग टू अदर फ्रीली एज बुलेट। 82

अनाचार से जो लड़े उसको मानें देव
हू इज नाउ करेजियस? हू इज सच मच ब्रेव? 83

जलें आज सद्भाव के नेह-भरे कुछ दीप
इन ऑवर सोसायटी ब्लैकनैस इज डीप। 84

आ जाता सुख-हास भी, कभी बदलता खेल
इन दिस लाइफ ट्रेजडी नो दस इन्टरवेल। 85

पलभर में जलकर बुझे सुख-सुहास के दीप
कॉमेडी इज मच लिटिल, सौरो वैरी डीप। 86

हम भी चाहें बाँट दें जग में प्रेम असीम
बट सिचुएशन नाउ इज एज हॉट स्ट्रीम। 87

मन माफिक होगा समय ऐसे व्हाई नॉट
स्ट्राइक दा आयरन व्हाइल इट इज हॉट। 88

सिर्फ त्याग की भावना मन में रखो सँभाल
डू लवली, बट कास्ट इट इन टू ए कैनाल। 89

तुम खुरपी औ’ मैं बनूँ हरी घास का प्लान्ट
माई ब्रादर दिस प्ले व्हाई डू यू वान्ट? 90

कुछ तो रहने दे इधर मीठे ख्वाब हसीन
स्प्रिन्ग सीजन ऑफ लव वान्ट ऑल विटवीन। 91

दुःखी न हो, कुछ हौसला मन में रखो सहेज
दस यू विल फाइन्ड यस वन्स मोर गुड डेज। 92

हरिना-से नैना भरे इस कारण से अश्क
इन हिज थिंकिंग नाउ मच देयर इज ए मस्क। 93

चंचल चितवन के हुए लज्जामय अब दौर
इन हर आइज ड्रीमफुल, लव इज मच मैच्यौर। 94

बुझा-बुझा-सा मन रहे, खोया तन का ओज
इन दिस टाइम हार्ट इज फुल विद मच ऐरोज। 95

क्यों करती तू प्रेम के इन खातों को क्लोज
इट इज पोइम ऑफ लव, मेक नॉट इट प्रोज। 96

इसी अदा का मैं कभी भूल न पाऊँ ओज
हर लॉफिग, स्माइलिंग इज लाइक ए रोज। 97

प्रेम-नाद में बन हिरन चैन न मन का खोज
व्हेयर लवली रोज इज, देयर मच ऐरोज। 98

अब भी भाषा प्यार की ऐ दिल वह समझे न
सो स्टोरी ऑफ लव टैल अगेन-अगेन। 99

लिखे विहँस वह प्यार के अक्षर ए टू जैड
हर आइज इज आलसो पैन-राइटिंगपैड। 100
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रमेशराज, 15/109, ईसानगर, निकट-थाना सासनीगेट, अलीगढ़
मो. 9634551630

Author
कवि रमेशराज
परिचय : कवि रमेशराज —————————————————— पूरा नाम-रमेशचन्द्र गुप्त, पिता- लोककवि रामचरन गुप्त, जन्म-15 मार्च 1954, गांव-एसी, जनपद-अलीगढ़,शिक्षा-एम.ए. हिन्दी, एम.ए. भूगोल सम्पादन-तेवरीपक्ष [त्रैमा. ]सम्पादित कृतियां1.अभी जुबां कटी नहीं [ तेवरी-संग्रह ] 2. कबीर जि़न्दा है [ तेवरी-संग्रह]3. इतिहास घायल है [... Read more
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