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देख फिर आई होली

लोधी डॉ. आशा 'अदिति'

लोधी डॉ. आशा 'अदिति'

कुण्डलिया

March 14, 2017

पीली सरसों ने किया, स्वर्ण कनक मनुहार
नीली अलसी मिल हुआ, अजब धरा श्रृंगार
अजब धरा श्रृंगार, देख फिर आई होली
रंग, अबीर, गुलाल, मस्त मस्तों की टोली
सुनकर ‘अदिति’ धमाल, छिपी सजनी नखरीली
साजन बन चितचोर, किया फिर नीली पीली

लोधी डॉ.आशा ‘अदिति’
भोपाल

Author
लोधी डॉ. आशा 'अदिति'
मध्यप्रदेश में सहायक संचालक...आई आई टी रुड़की से पी एच डी...अपने आसपास जो देखती हूँ, जो महसूस करती हूँ उसे कलम के द्वारा अभिव्यक्त करने की कोशिश करती हूँ...पूर्व में 'अदिति कैलाश' उपनाम से भी विचारों की अभिव्यक्ति....
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