देखो री सखी सावन आयो

देखो री सखी सावन आयो
टिप- टिप पानी बरसे
पिया मिलन को मन तरसे
पेड़ों से लिपटी ये बेले
मस्ती में हवाएं डोले
राज यह दिल का खोलें
हरियाली चहुं ओर है छाई
भीगा तन बारिश जब आयी
डोल उठा मन ये चंचल
हिलकोरें खाए मेरा तनबदन
नदियां कलकल बहती जाए
कोयल भी आवाज़ सुनाए
पेड़ों पर झूले के धागे
सखियां सब नाचन को भागे
गीत सुहाने गाए…..
देखो री सखी………………
त्योहारों के मौसम आए
तीज हरियाली व्रत सब लाए
डम डम डम डम डमरू बाजे
बम बम कह कावरिया नाचे
मन उमंग से भरता जाए
देखो री सखी……………….

*******सावन महीने की प्रस्तुति*********

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