देखना तुम ये ज़माना भी बदल जायेगा

देखना तुम ये ज़माना भी बदल जायेगा
तीर का उसके निशाना भी बदल जायेगा

जैसे रह पाई नहीं एक जगह खुशियाँ हैं
कल को गम का ये ठिकाना भी बदल जायेगा

ज़िन्दगी ने ही अगर अपने बदल डाले सुर
क्या जरूरी है तराना भी बदल जायेगा

किसको मालूम था हालात बदल जाएंगे
लग गले मिलना मिलाना भी बदल जायेगा

यूँ मुहब्बत के फसाने तो हुआ करते हैं
कल तुम्हारा ये फसाना भी बदल जायेगा

जी लो जी भर के हसीं पल जो मिले हैं हमको
है ये मौसम जो सुहाना भी बदल जायेगा

दिल में गर दीप जला लेंगे मुहब्बत के हम
‘अर्चना’ का तो बहाना भी बदल जायेगा

26-09-2020
डॉ अर्चना गुप्ता
मुरादाबाद

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