Sep 12, 2016 · कविता
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देखते है कि आपका मुँह खुलेगा भी या नहीं

होली के अबसर पर
पानी की बर्बादी की बात करने बाले
शिवरात्रि पर शिव पर दूध अर्पित करने को
कुपोषण से जोड़ने बाले
और दूध की कमी का रोने बाले
प्रकाश उत्सब पर पर्याबरण की चिंता करने बाले
तथाकथित बुद्धिजीबी लोग
कल बकरीद आने बाली है
हम भी
आपके मुख से
जीब हत्या और
सही क़ुरबानी के मायने
क्या हैं
इस पर आपके बिचार जानने को इच्छुक हैं
देखते है कि
आपका मुँह खुलेगा भी या नहीं

मदन मोहन सक्सेना

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मदन मोहन सक्सेना
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मदन मोहन सक्सेना पिता का नाम: श्री अम्बिका प्रसाद सक्सेना संपादन :1. भारतीय सांस्कृतिक समाज... View full profile
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