कविता · Reading time: 1 minute

देखकर एक झोपड़ी आँख मेरी रो पड़ी

देखकर एक झोपड़ी आँख मेरी रो पड़ी !

सो रहा था एक बच्चा माँ की अपनी गोद में !
गोद में गुदड़ी नहीं थी साड़ी लिपटी तोद में !!

कह रही थीं माँ की ममता लाल मेरा सो गया !
दिन में अच्छा था भला रात में क्या हो गया !!

कोई तो उसको जगा दे आई कैसी ए घड़ी !
देखकर एक झोपड़ी आँख मेरी रो पड़ी !!

ठंड थीं उस दिन भयानक तन में कपड़े थे नहीं !
रब ना दे ऐसी गरीबी आँख मुझसे कह रही !!

सो गया भूखा वो बच्चा भाइयों के साथ में !
साथ में था माँ का आँचल टुकड़ा रोटी हाथ में !!

वोट पाकर खुश है नेता बात करता है बड़ी !
देखकर एक झोपड़ी आँख मेरी रो पड़ी !!

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