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दृष्टि प्रेम पथ

Ashutosh Jadaun

Ashutosh Jadaun

लेख

August 1, 2017

अक्सर कुछ कुछ सुना है और कुछ कुछ जीवन के अनुभव से जाना है , दृष्टि ही सृष्टि का निर्माण करती है । वही दृष्टि क्या प्रेम पथ पर अडिग पथिक के लिए साधन मात्र नही है । और क्या वही दृष्टि वेर भाव को तजने का स्तोत्र मात्र नही है । स्वयमेव विचार कीजिएगा और जानिएगा ।
सहज दृष्टि करुणा है प्रेम है
मानव मे महामानव का प्रादुर्भाव है ।।

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Author
Ashutosh Jadaun
स्वागत हैं मेरे जज्बात साज़ गीतों में. कभी जब मैं यूँ ही तन्हा बैठता हूँ ,और अचानक ही पुरानी यादों की बारिशें,मेरे जेहन में बेतरतीब से ख्याल बूँद बनकर, मेरी कलम से कागज़ पे लफ्ज़ उकेरने को मचलने लगती है... Read more

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