दूसरी बिटिया

पलकें जब अपनी खोली थी मैंने,
एक नया संसार सामने था।
एक नया एहसास था रोशनी का,
ईश्वर की अनुपम सृष्टि का।
मैंने यहां देखा,कभी वहां देखा,
कोई मेरे आगमन से खुश न दिखा।
मैं तो नन्ही कली थी खिलने को तैयार
पर मुझे किसी की आंखों में नहीं दिखा था प्यार,
ऐसा स्वागत क्यों हुआ मेरा,ना समझ सकी,
मैं भी तो हूं आखिर उसी ईश्वर की कृति।
मन बुझने लगा था तभी अचानक,
एक कोमल स्पर्श का एहसास हुआ।
किसी ने चूमा प्यार से, बालों को सहलाया, मेरे सामने एक प्यारा सा आंचल लहराया।
तू मेरी है, दुनिया में एक ज्योति बन कर दिखाना।
खुद जलना भी पड़े पर विश्व आलोकित कर जाना।
वह माँ थी मेरी,जिसने सिखलाया जगमगाना, वह माँ थी मेरी जिससे मैंने प्यार का मतलब जाना।

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