गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

दूर होकर भी पास हो तुम।

सांसो का विश्वास हो तुम।
धड़कनों की आस हो तुम ।
करवटों में बीत जाती रातें,
दूर होकर भी पास हो तुम।
तन्हाई के इस आलम में,
हर लम्हें के खास हो तुम।

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