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**दूर रहकर भी तुम नज़दीक हो मेरे**यादों में हर पल हो तुम मेरे

*** रूठे हो तुम जो मुझसे
कैसे तुम्हें मैं मनाऊँ
सोच रही हूँ मैं
कैसे तुम्हें नज़दीक बुलाऊँ |

********

इन दूरियों को
एक दिन जरूर मिटाऊँगी मैं
पास तुम्हें मैं अपने
ज़रूर ले आऊँगी मैं

*******

यकीन है ये मुझको
रूठे हो तुम मुझसे मना लूँगी एक दिन
ये जो दूरिया हैं
सब मिटा दूँगी एक दिन

******

तुम नहीं हो बेवफ़ा
जो न वापिस आओगे
दूरियाँ तो नाराज़गी की हैं
नज़दीक तुम जरूर आओगे

*******

वफा जो न करते हैं
वही दूर जाते हैं
बुलाने पर भी वह वापिस
कभी न आते हैं

******

वफा तो मैंने तुमसे ; तुमने मुझसे निभाई है पल-पल
दूरियाँ तो गलतफहमी की हैं
लोटकर दोनों एक दिन आएँगे यहीं पर
लोटकर दोनों एक दिन आएँगे यहीं पर
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डॉ. नीरू मोहन 'वागीश्वरी'
डॉ. नीरू मोहन 'वागीश्वरी'
दिल्ली
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व्यवस्थापक- अस्तित्व जन्मतिथि- १-०८-१९७३ शिक्षा - एम ए - हिंदी एम ए - राजनीति शास्त्र...