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ठाठ रहे रे

विजय कुमार नामदेव

विजय कुमार नामदेव

गज़ल/गीतिका

February 14, 2017

बेशर्म की कलम से

बुंदेली पुट

अरे कछु ने कर रय हैं
सब घिरया के धर रय हैं।।

पुलिया सड़क गिट्टी को पैसा।
ठूंस – ठूंस के भर रय हैं।।

हम गरीब सो हम जानत हैं।
कैसे जी रय मर रय हैं।।

हाथ जोर के फिरे चार दिन।
डरे डरे अब चर रय हैं।।

सही कहो तो आँख तरेरें।
लाल “बेशर्म” पर रय हैं।

विजय बेशर्म
(गाडरवारा ) 9424750038

Author
विजय कुमार नामदेव
सम्प्रति-अध्यापक शासकीय हाई स्कूल खैरुआ प्रकाशित कृतियां- गधा परेशान है, तृप्ति के तिनके, ख्वाब शशि के, मेरी तुम संपर्क- प्रतिभा कॉलोनी गाडरवारा मप्र चलित वार्ता- 09424750038
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