दूर कर दुर्गति जगत की

दूर कर दुर्गति जगत की
लाज रख अपने भगत की
दया सुत पर करो हे माँ
नमित चरणों में शीश है
सुखद तव आशीष है

महाशक्ति तू निराली
दुर्गा तू है तू ही काली
तेरे नव नव रूप जग में
ध्यान धरते महीश है
सुखद तव आशीष है

असुर दल तूने संहारे
दानव दल माँ तूने मारे
सिंह वाहनी करुणा मयी
आराधे जगदीश है
सुखद तव आशीष है

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