कविता · Reading time: 1 minute

“दूरी बहुत जरूरी है “

आज लगभग सम्पूर्ण विश्व कोविड-19 संक्रमण नामक महामारी से पीडित है। भारत में भी वर्तमान समय में लॉकडाउन की स्थिति बनी हुई है। प्राणी विचलित भी है और विवश भी।
उपरोक्त स्थिति को मैंने अपनी कविता में प्रकट करने का प्रयत्न किया है,जिसका शीर्षक है “दूरी बहुत जरूरी है”

“दूरी बहुत जरूरी है ”

इंसानों को इंसानों से जो दूर करें ये कैसी मजबूरी है।
जिन्दा रहने के खातिर पर दूरी बहुत जरूरी है।

सब तामझाम संधान लिए,जाने कैसी तैयारी है।
जो कर्मकाण्ड को त्यागेगा,वही जीने का अधिकारी है।
निष्काम भाव से काम त्याग कर,अब घर ही सबकी धुरी है।
जिन्दा रहने के खातिर अब, दूरी बहुत जरूरी है।

चुम्बन और आलिंगन युग में, फिर से प्रेम पत्र सा दौर चला है।
लौट पुरानी यादों का आना, हृदय को झकझोर चला है।
ये किस्से है नादानी के,ये बातें अभी अधूरी है।
जिन्दा रहने के खातिर अब, दूरी बहुत जरूरी है।

घर छोडा जिसने घर के खातिर,दूर देश को चले गये।
घर तक आने में हानि है,प्रमाण वाद के दिये गये।
वह कर्म का साधक घर पर है,जो करता नित मजदूरी है।
जिन्दा रहने के खातिर अब, दूरी बहुत जरूरी है।

न मन्दिर में न मस्जिद में,जो दरगाहों में नही मिलें।
श्वेत वस्त्र को धारण कर,वो स्वयं चिकित्सक बने मिलें।
प्रभु चन्दन से वन्दन होगा तेरा,हर लो जो मजबूरी है।
जिन्दा रहने के खातिर अब, दूरी बहुत जरूरी है।

कुमार अखिलेश
जिला देहरादून (उत्तराखण्ड)
मोबाइल नंबर 09627547054

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