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दुश्मन नए मिले

Ashok Kumar Raktale

Ashok Kumar Raktale

गज़ल/गीतिका

July 18, 2016

जब छीनने छुडाने के साधन नए मिले
हर मोड़ पर कई-कई सज्जन नए मिले

कुछ दूर तक गई भी न थी राह मुड़ गई
जिस राह पर फूलों भरे गुलशन नए मिले

काँटों से खेलता रहा कैसा जुनून था
उफ़! दोस्तों की शक्ल में दुश्मन नए मिले

जितने भी काटता गया जीवन के फंद वो
उतने ही जिंदगी उसे बंधन नए मिले

अपनों से दूर कर रहा उनका मिज़ाज भी
गलियों से अब जो गाँव की आँगन नए मिले

~ अशोक कुमार रक्ताले.

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