दुश्मन जमाना बेटी का

????

क्यों जमाना दुश्मन है, बेटी का हर बार।
क्यों पहले ही जन्म के, बेटी देता मार।
जीने का अधिकार दो।। 1

यहाँ मौत के बाद तो , सभी चिता में जाय।
जग बैरी बन बेटियाँ, जिन्दा दिया जलाय।।
माँ कुछ तो उपाय करो ।। 2

नर-नारी दोनों बने, इस जग के आधार।
फिर क्यों दुनिया एक को, समझ रही बेकार।।
नारी से संसार है। 3

जग में नारी शक्ति तो, आप दिखाई देत।
जग बैरी फिर भी सदा, उसे लगाये बेंत।
जीवन कांटों से भरी। 4

दुर्गा, काली शक्ति मैं , समझ नहीं लाचार।
जल जाओगे छेड़ मत, मैं जलती अंगार।
दुश्मन जमाना बच के। 5

बैरी जग से मैं सभी , छिन लूँगी अधिकार।
नहीं सहूँगी अब कभी , कोई अत्याचार। ।
नारी आगे बढ़ रही। 6
????—लक्ष्मी सिंह ?☺

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like Comment 0
Views 161

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share