Apr 16, 2021 · कविता
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नई दुल्हन

लाल जोड़े में सजी थी
घूंघट में शरमा रही थी
आज देखा मेरे सामने से
नई दुल्हन जा रही थी ।।

आज वो जा रही थी
अपने प्रियतम के घर
जिसको प्यार किया
उसे वही मिला था वर।।

आंखों में अरमान उसके
उसके दिल में थे सवाल
अभी भी आ रहा था उसको
अपने मायके का ही ख्याल।।

थोड़ा डर था उसको
थोड़ी अनिश्चितता भी
जा रही नई दुनिया में
इसका बहुत उत्साह भी।।

झुकी थी नजरें उसकी
लग रही थी बहुत प्यारी
जा रही थी वो ससुराल
दुआएं लेकर बहुत सारी।।

बैठे थे बगल में उसकी
दूल्हे राजा भी तो आज
जा रही जिसके घर में
दुल्हन करने अब राज।।

पहुंचते ही ससुराल
दुल्हन रूपी लक्ष्मी की
हो रही थी द्वार पे पूजा
अब इस घर में उसको
निभाना था किरदार दूजा।।

उस घर में वो बेटी थी
बहन थी और बुआ थी किसी की
इस घर में एक पत्नी है
बहू है और मां होगी किसी की ।।

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Surender Sharma
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