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दुलहिन के मुह देख के दादू दूर किहिन महतारी !

Ashish Tiwari

Ashish Tiwari

कविता

July 8, 2016

दुलहिन के मुह देखके दादू दूर किहिन महतारी !
बाप बिचारा मरय रात दिन तबहू पाबय गारी !!

बूटी बिटिया रोटी पोबय खाय ले दादू भईया !
भउजी टाग पसारे सोबय पार करा प्रभु नईया !!

मीठ मीठ बोलिआय न दादू साढ़ू सरहज सारी !
दुलहिन के मुह देख के दादू दूर किहिन महतारी !!

रोज बिहन्ने दाई बाबा एक कफ चाय का तरसा !
गाँजा, दारू, सुट्टा, सोटय लइके दउड़य फरसा !!

खुसुर खुसुर खुसुराय दुपहरी चढ़िके महल अटारी !
दुलहिन के मुह देख के दादू दूर किहिन महतारी !!

भूलि गये दादू अब देखा कसके अम्मा पालिस !
नौ माह तक पेट फुलाए पेट के लाने बागिस !!

जेका पैदा किहिस अम्मबा अब ओहिन से हारी !
दुलहिन के मुह देख के दादू दूर किहिन महतारी !!

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मौलिक कवि आशीष जुगनू 09200573071

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Author
Ashish Tiwari
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